आजकल ट्रैफिक नियम तोड़ते ही चालान सीधे मोबाइल पर मैसेज के रूप में आ जाता है। पहले जहां पुलिस रोककर कागज़ पर चालान काटती थी, वहीं अब कैमरा, स्पीड गन और ऑनलाइन सिस्टम की वजह से ई-चालान आम हो चुका है। बहुत से लोगों को चालान भरने की प्रक्रिया समझ में नहीं आती। कई लोग डर जाते हैं कि कहीं लेट फीस न लग जाए या कोर्ट का नोटिस न आ जाए। सच यह है कि ई-चालान जमा करना अब पहले से कहीं आसान हो गया है, बस सही तरीका पता होना चाहिए।
ई-चालान क्या होता है और कैसे बनता है?
ई-चालान ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से जारी किया गया जुर्माना है। यह वाहन नंबर के आधार पर जनरेट होता है। अगर आपने हेलमेट नहीं पहना, रेड लाइट तोड़ी, ओवरस्पीडिंग की या नो-पार्किंग में गाड़ी खड़ी की, तो चालान सिस्टम में दर्ज हो जाता है।
भारत में अधिकतर राज्यों का डेटा केंद्रीय पोर्टल Parivahan Sewa से जुड़ा होता है। वहीं राज्य स्तर पर जैसे Delhi Traffic Police या Maharashtra Traffic Police अपनी-अपनी वेबसाइट पर भी चालान देखने और भरने की सुविधा देते हैं।
ई-चालान बनने के बाद आमतौर पर वाहन मालिक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर SMS आता है। अगर नंबर अपडेट नहीं है, तो कई बार जानकारी नहीं मिलती, लेकिन चालान सिस्टम में दर्ज रहता है।
ई-चालान चेक करने का सही तरीका
चालान भरने से पहले सबसे जरूरी है उसका स्टेटस देखना। इसके लिए आपको वाहन नंबर और कभी-कभी चेसिस नंबर के अंतिम 5 अंक चाहिए होते हैं।
आप आधिकारिक पोर्टल Parivahan Sewa पर जाकर “Check Challan Status” विकल्प चुन सकते हैं। वहां वाहन नंबर डालते ही अगर कोई पेंडिंग चालान है तो उसकी पूरी जानकारी दिख जाएगी—तारीख, स्थान, उल्लंघन का प्रकार और जुर्माने की राशि।
राज्य पुलिस वेबसाइट पर भी यही प्रक्रिया होती है। ध्यान रखें कि हमेशा आधिकारिक वेबसाइट पर ही जानकारी डालें। गूगल पर कई फर्जी वेबसाइट भी दिख जाती हैं जो लोगों से पैसे ठगने के लिए बनाई जाती हैं।
ऑनलाइन ई-चालान जमा करने का तरीका
ऑनलाइन भुगतान सबसे आसान और तेज तरीका है।
सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल पर लॉगिन करें या वाहन नंबर से चालान सर्च करें। चालान की डिटेल सामने आने के बाद “Pay Now” का विकल्प दिखेगा।
इसके बाद आप नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या UPI के जरिए भुगतान कर सकते हैं। भुगतान करते समय ध्यान रखें कि नेटवर्क सही हो और पेज बीच में बंद न करें।
पेमेंट सफल होते ही आपको स्क्रीन पर रसीद दिखाई देगी। उसे तुरंत डाउनलोड कर लें और PDF के रूप में सेव कर लें। कई बार SMS या ईमेल के जरिए भी कन्फर्मेशन आता है।
UPI से चालान भरना
आजकल ज्यादातर लोग UPI का इस्तेमाल करते हैं। भुगतान के दौरान UPI विकल्प चुनकर आप अपने ऐप—जैसे Google Pay, PhonePe या BHIM—से पेमेंट कर सकते हैं।
ध्यान रखें कि UPI आईडी सही डालें और पेमेंट कन्फर्म होने तक पेज बंद न करें। अगर पेमेंट कट गया लेकिन चालान “Pending” दिख रहा है, तो 24 घंटे तक इंतजार करें। अक्सर सिस्टम अपडेट होने में समय लगता है।
ऑफलाइन ई-चालान जमा करने का तरीका
अगर आपको ऑनलाइन भुगतान में दिक्कत हो रही है, तो आप ऑफलाइन भी चालान भर सकते हैं।
आप नजदीकी ट्रैफिक पुलिस कार्यालय या लोक अदालत में जाकर चालान जमा कर सकते हैं। वहां चालान नंबर बताकर नकद या निर्धारित तरीके से भुगतान किया जा सकता है।
कुछ मामलों में कोर्ट चालान होने पर आपको निर्धारित तारीख पर अदालत में पेश होना पड़ता है। वहां मजिस्ट्रेट के सामने जुर्माना तय होता है और उसी समय भुगतान किया जाता है।
कोर्ट चालान का अलग नियम
अगर आपके चालान पर “Court” लिखा है, तो इसका मतलब है कि मामला अदालत में भेजा गया है। यह आमतौर पर गंभीर उल्लंघन के मामलों में होता है—जैसे बिना लाइसेंस ड्राइविंग या खतरनाक ड्राइविंग।
ऐसे मामलों में ऑनलाइन भुगतान का विकल्प नहीं होता। आपको तय तारीख पर कोर्ट में उपस्थित होकर जुर्माना भरना पड़ता है।
कोर्ट चालान को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है, क्योंकि इससे वारंट या लाइसेंस सस्पेंशन जैसी कार्रवाई हो सकती है।
चालान लेट भरने पर क्या होता है?
बहुत लोग सोचते हैं कि बाद में भर देंगे, लेकिन चालान लंबे समय तक पेंडिंग रहने पर परेशानी बढ़ सकती है।
कुछ राज्यों में लेट फीस लग सकती है। कुछ मामलों में वाहन की RC ट्रांसफर या अन्य RTO सेवाएं रोक दी जाती हैं जब तक चालान क्लियर न हो।
इसलिए चालान दिखते ही उसे जल्द से जल्द जमा कर देना समझदारी है।
पेमेंट फेल हो जाए तो क्या करें?
अगर आपके अकाउंट से पैसे कट गए लेकिन चालान स्टेटस अपडेट नहीं हुआ, तो घबराएं नहीं।
सबसे पहले 24 से 48 घंटे इंतजार करें। अधिकतर मामलों में पैसा या तो वापस आ जाता है या चालान क्लियर हो जाता है।
अगर फिर भी समस्या रहे, तो संबंधित ट्रैफिक पुलिस हेल्पलाइन या पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। भुगतान की रसीद और बैंक ट्रांजेक्शन आईडी संभालकर रखें।
रसीद डाउनलोड करना क्यों जरूरी है?
ई-चालान भरने के बाद रसीद डाउनलोड करना बहुत जरूरी है।
भविष्य में अगर कोई विवाद हो जाए या सिस्टम में गलती से चालान फिर दिखने लगे, तो आपके पास भुगतान का प्रमाण होना चाहिए।
रसीद को मोबाइल और ईमेल दोनों में सुरक्षित रखें।
गाड़ी बेचने से पहले चालान क्लियर करें
अगर आप अपनी गाड़ी बेचने की सोच रहे हैं, तो पहले सभी पेंडिंग चालान क्लियर कर लें।
नया मालिक अक्सर वाहन नंबर से चालान चेक करता है। अगर पेंडिंग दिखा, तो वह कीमत कम करने की कोशिश कर सकता है या सौदा रद्द भी कर सकता है।
साफ रिकॉर्ड गाड़ी की वैल्यू बढ़ाता है।
फर्जी मैसेज से सावधान रहें
आजकल कई लोगों को फर्जी SMS आते हैं जिनमें चालान भरने का लिंक दिया होता है।
कभी भी अनजान लिंक पर क्लिक करके भुगतान न करें। हमेशा आधिकारिक पोर्टल—जैसे Parivahan Sewa—का ही उपयोग करें।
अगर संदेह हो, तो सीधे राज्य ट्रैफिक पुलिस की वेबसाइट पर जाकर चालान चेक करें।
ई-चालान जमा करना अब जटिल प्रक्रिया नहीं है। सही वेबसाइट पर जाकर कुछ मिनटों में आप भुगतान कर सकते हैं।
सबसे जरूरी बात है कि चालान को नजरअंदाज न करें। समय पर भुगतान करने से आप अतिरिक्त जुर्माने और कानूनी झंझट से बच सकते हैं।
ऑनलाइन या ऑफलाइन—दोनों तरीके सुरक्षित हैं, बस सावधानी और सही जानकारी जरूरी है।
अगर आप नियमित रूप से वाहन चलाते हैं, तो समय-समय पर चालान स्टेटस चेक करते रहें। छोटी सी लापरवाही बड़ी परेशानी में बदल सकती है, लेकिन सही समय पर उठाया गया कदम आपको पूरी तरह सुरक्षित रखता है।