जब भी हम अपनी गाड़ी बेचने या खरीदने की सोचते हैं, सबसे बड़ा सवाल जो सामने आता है वह है RC ट्रांसफर। यानी Registration Certificate का नाम बदलवाना। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि गाड़ी पर पहले से ट्रैफिक चालान पेंडिंग होता है। तब मन में डर और भ्रम दोनों पैदा होते हैं—क्या बिना चालान भरे RC ट्रांसफर हो सकती है? क्या RTO आवेदन स्वीकार करेगा? क्या नया मालिक बाद में फंस सकता है?
इस लेख में हम इसी विषय को विस्तार से समझेंगे—कानूनी नियम क्या कहते हैं, व्यवहार में क्या होता है, और आपको क्या सावधानी रखनी चाहिए।
RC ट्रांसफर क्या होती है और क्यों जरूरी है?
RC यानी Registration Certificate वह दस्तावेज है जो यह साबित करता है कि वाहन किस व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड है। भारत में यह प्रक्रिया आमतौर पर राज्य के RTO के माध्यम से की जाती है और अब अधिकतर राज्यों में इसे ऑनलाइन भी किया जा सकता है, जैसे कि Parivahan Sewa पोर्टल के जरिए।
जब आप गाड़ी बेचते हैं, तो RC ट्रांसफर करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। अगर RC ट्रांसफर नहीं होती और गाड़ी से कोई दुर्घटना, अपराध या ट्रैफिक नियम उल्लंघन होता है, तो जिम्मेदारी पुराने मालिक पर भी आ सकती है।
पेंडिंग चालान क्या होता है?
पेंडिंग चालान वह ट्रैफिक फाइन है जो वाहन पर जारी तो हो चुका है, लेकिन अभी तक उसका भुगतान नहीं किया गया है। आजकल अधिकतर राज्यों में ई-चालान सिस्टम लागू है, और ट्रैफिक कैमरा, स्पीड गन या पुलिस अधिकारी के माध्यम से चालान सीधे वाहन नंबर पर जनरेट हो जाता है।
ई-चालान की जानकारी कई बार SMS के जरिए भी आती है और इसे ऑनलाइन देखा जा सकता है, जैसे कि Maharashtra Traffic Police या Delhi Traffic Police की वेबसाइट पर।
क्या पेंडिंग चालान के साथ RC ट्रांसफर संभव है?
अब सबसे अहम सवाल—क्या पेंडिंग चालान होने पर RC ट्रांसफर हो सकती है?
इसका जवाब सीधा “हाँ” या “नहीं” नहीं है, बल्कि स्थिति पर निर्भर करता है।
कई राज्यों में यदि वाहन पर मामूली ट्रैफिक चालान पेंडिंग है, तो सिस्टम आवेदन स्वीकार कर लेता है। लेकिन कुछ राज्यों में RTO सिस्टम RC ट्रांसफर से पहले सभी पेंडिंग चालान क्लियर होने की शर्त रखता है।
यानी यह राज्य और स्थानीय RTO की नीति पर निर्भर करता है।
ऑनलाइन आवेदन करते समय क्या होता है?
अगर आप RC ट्रांसफर के लिए Parivahan Sewa पोर्टल पर आवेदन करते हैं, तो सिस्टम वाहन की पूरी डिटेल निकालता है—इंश्योरेंस, PUC, टैक्स और चालान स्टेटस।
कई मामलों में, यदि गंभीर चालान (जैसे कोर्ट चालान या ओवरस्पीडिंग का बड़ा फाइन) पेंडिंग है, तो सिस्टम आवेदन रोक सकता है। कुछ जगहों पर आवेदन सबमिट हो जाता है लेकिन फिजिकल वेरिफिकेशन के समय आपसे चालान भरने के लिए कहा जाता है।
कोर्ट चालान और सामान्य चालान में अंतर
अगर चालान “कोर्ट चालान” के रूप में दर्ज है, तो मामला थोड़ा गंभीर हो जाता है। कोर्ट चालान का मतलब है कि ट्रैफिक उल्लंघन इतना गंभीर था कि उसे सीधे अदालत में पेश किया गया है।
ऐसे मामलों में RC ट्रांसफर लगभग असंभव हो जाती है जब तक कि केस निपट न जाए।
जबकि सामान्य ई-चालान, जैसे हेलमेट न पहनना या नो-पार्किंग, अक्सर भुगतान करके तुरंत क्लियर किया जा सकता है।
नया मालिक क्यों फंस सकता है?
मान लीजिए आपने गाड़ी खरीद ली और RC ट्रांसफर करवा ली। लेकिन बाद में पता चला कि पुराने मालिक के समय का चालान पेंडिंग था।
कई बार सिस्टम वाहन नंबर के आधार पर चालान दिखाता है, न कि व्यक्ति के नाम पर। इसलिए नया मालिक भी भुगतान के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
इसलिए गाड़ी खरीदने से पहले चालान स्टेटस चेक करना बहुत जरूरी है।
चालान स्टेटस कैसे चेक करें?
आप वाहन नंबर और चेसिस नंबर के अंतिम 5 अंकों की मदद से चालान स्टेटस ऑनलाइन देख सकते हैं। इसके लिए आप Parivahan Sewa पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं या अपने राज्य की ट्रैफिक पुलिस वेबसाइट पर जा सकते हैं।
यह प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है और इससे आपको बड़ी कानूनी परेशानी से बचाव मिल सकता है।
RTO स्तर पर क्या होता है?
RTO अधिकारी के पास वाहन की पूरी हिस्ट्री होती है। यदि ट्रांसफर के दौरान सिस्टम में “ड्यूज़” दिखता है, तो अधिकारी आवेदन रोक सकता है और पहले चालान भरने को कह सकता है।
कुछ राज्यों में यह नियम सख्ती से लागू है, जबकि कुछ जगहों पर मामूली चालान को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
इसलिए स्थानीय RTO से पहले जानकारी लेना समझदारी है।
क्या बिना चालान भरे RC ट्रांसफर कराना सुरक्षित है?
तकनीकी रूप से संभव हो सकता है, लेकिन सुरक्षित नहीं है।
अगर चालान पेंडिंग है और बाद में कानूनी नोटिस आता है, तो नया मालिक भी परेशान हो सकता है।
इसलिए सलाह यही है कि गाड़ी बेचने या खरीदने से पहले सभी चालान क्लियर कर लें।
बैंक लोन और RC ट्रांसफर
अगर वाहन पर लोन चल रहा है और साथ ही चालान भी पेंडिंग है, तो मामला और जटिल हो सकता है।
बैंक NOC देने से पहले वाहन की स्थिति देख सकता है। कई बार बैंक भी सलाह देता है कि पहले सभी कानूनी ड्यूज़ क्लियर करें।
इंश्योरेंस क्लेम पर असर
अगर गाड़ी पर गंभीर ट्रैफिक उल्लंघन दर्ज है और दुर्घटना हो जाती है, तो इंश्योरेंस कंपनी जांच के दौरान पुराने चालान भी देख सकती है।
हालांकि सामान्य चालान का सीधा असर क्लेम पर नहीं पड़ता, लेकिन गंभीर कानूनी मामला हो तो समस्या हो सकती है।
सुरक्षित लेन-देन के लिए क्या करें?
गाड़ी खरीदते समय:
- RC की कॉपी देखें
- इंश्योरेंस और PUC चेक करें
- चालान स्टेटस ऑनलाइन देखें
- पुराने मालिक से लिखित घोषणा लें कि कोई ड्यूज़ पेंडिंग नहीं है
गाड़ी बेचते समय:
- सभी चालान पहले भर दें
- ट्रांसफर प्रक्रिया खुद मॉनिटर करें
- डिलीवरी नोट और फॉर्म 29/30 सुरक्षित रखें
तो क्या पेंडिंग चालान के साथ RC ट्रांसफर हो सकती है?
हाँ, कई मामलों में संभव है, लेकिन यह राज्य और चालान की प्रकृति पर निर्भर करता है।
फिर भी कानूनी और सुरक्षित दृष्टिकोण यही है कि RC ट्रांसफर से पहले सभी चालान क्लियर कर दिए जाएं।
यह कदम न केवल आपको भविष्य की परेशानी से बचाएगा, बल्कि गाड़ी खरीदने और बेचने दोनों पक्षों के लिए पारदर्शिता भी सुनिश्चित करेगा।
अगर आप वाहन खरीदने की सोच रहे हैं, तो एक छोटा सा ऑनलाइन चेक आपको बड़ी मुसीबत से बचा सकता है। और अगर बेच रहे हैं, तो साफ रिकॉर्ड आपकी गाड़ी की वैल्यू भी बढ़ाता है।
सही जानकारी, सही समय पर—यही समझदारी है।